पहले नहा खा के विषय में बात करते हैं 9 सितंबर 2020 बुधवार

व्रत से एक दिन पहले सप्तमी 9 सितंबर को महिलाएं नहाय-खाए करेंगी. गंगा सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद मड़ुआ रोटी, नोनी का साग, कंदा, झिमनी आदि का सेवन करेंगी. व्रती स्नान- भोजन के बाद पितरों की पूजा भी करेंगी. नहाय-खाय की सभी प्रक्रिया 9 सितंबर की रात 9 बजकर 47 मिनट से पहले ही करना होगा. क्योंकि 9 बजकर 47 मिनट के बाद अष्टमी तिथि शुरू हो जाएगी नहाय खाय की रात को छत पर जाकर चारों दिशाओं में कुछ खाना रख दिया जाता है. ऐसी मान्यता है कि यह खाना चील व सियारिन के लिए रखा जाता है.

अब व्रत के विषय में बात करें:-
जीवपुत्रिका का व्रत निर्जला किया जाता है. जिसमें पूरे दिन और रात को पानी भी नहीं पीया जाता है.यह व्रत बड़ी श्रद्धा-भाव-भक्ति के साथ मनाया जाता है. यह व्रत संतान की मंगलकामना के लिए किया जाता है. इस व्रत को माताएं रखती हैं
आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि 09 सितंबर की रात में 9 बजकर 46 मिनट पर प्रारंभ होगा और 10 सितंबर की रात 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. 10 सितंबर को अष्टमी में, इसी दिन जिउतिया पर्व मनाया जाएगा

अब पारण के विषय में :-
जिउतिया व्रत का पारण करने का शुभ समय 11 सितम्बर की सुबह सूर्योदय से लेकर दोपहर 12 बजे तक रहेगा. व्रती महिलाओं को जिउतिया व्रत के अगले दिन 11 सितंबर को 12 बजे से पहले पारण करना होगा.

जितिया के पारण के नियम भी अलग-अलग जगहों पर भिन्न हैं. कुछ क्षेत्रों में इस दिन नोनी का साग, मड़ुआ की रोटी आदि खाई जाती है।

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