• गर्भवतियों में डिहाइड्रेशन की स्थिति शिशु के लिए हो सकती है घातक
  • गर्भवती महिलाओं व बच्चों के लिए ओआरएस का सेवन फायदेमंद
    आरा, 16 अप्रैल| तेजी से तापमान में बढ़ोत्तरी हो रही है। ऐसे बदलते मौसम में डायरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी होती है। डायरिया के कारण बच्चों और वयस्कों में अत्यधिक निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) होने से समस्याएं बढ़ जाती है। वहीं, कुशल प्रबंधन व जानकारी के अभाव में यह जानलेवा भी हो जाता है। इसके लिए डायरिया के लक्षणों के प्रति सतर्कता एवं सही समय पर उचित प्रबंधन कर डायरिया जैसे गंभीर रोग से आसानी से बचा जा सकता है। प्राथमिक उपचार के रूप में ओआरएस का घोल दिया जा सकता है जिससे निर्जलीकरण की स्थिति से बचा जा सके। ओआरएस का घोल गर्भवती महिलाओं के साथ बच्चों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। उसके बाद भी यदि मरीज को इससे राहत न मिले, तो बिना विलम्ब किये तुरंत मरीज को चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। जिससे मरीज की शीघ्र इलाज की समुचित व्यवस्था हो सके।
    विभिन्न प्रकार के होते हैं डायरिया के लक्षण :
    अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (एसीएमओ) सह सीडीओ डॉ. विनोद कुमार ने बताया सामान्य रूप से डायरिया व उसके लक्षण विभिन्न प्रकार के होते हैं। पहला एक्यूट वाटरी डायरिया जिसमें दस्त काफ़ी पतला होता है और यह कुछ घंटों या कुछ दिनों तक ही होता है इससे निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) एवं अचानक वजन में गिरावट होने का ख़तरा बढ़ जाता है। दूसरा एक्यूट ब्लडी डायरिया जिसे शूल के नाम से भी जाना जाता है। इसके कारण मरीज की आंत में संक्रमण व कुपोषण का खतरा बढ़ जाता है। तीसरा परसिस्टेंट डायरिया जो 14 दिन या इससे अधिक समय तक रहता है। इसके कारण बच्चों में कुपोषण एवं गैर-आंत के संक्रमण फ़ैलने की संभावना बढ़ जाती है। इन सबके अलावा चौथा अति कुपोषित बच्चों में होने वाला डायरिया होता है जो गंभीर डायरिया की श्रेणी में आता है। इससे व्यवस्थित संक्रमण, निर्जलीकरण, हृदय संबंधित समस्या, विटामिन एवं जरूरी खनिज लवण की कमी हो जाती है।
    ज्यादा घरेलु उपचार से बचें लोग :
    एसीएमओ ने बताया डायरिया के लक्षण यदि ओआरएस के सेवन के बाद भी रहे तो अविलम्ब मरीज को डॉक्टर के पास ले जाएं तथा उचित उपचार कराएं। इसमें विलम्ब जानलेवा साबित हो सकता है और डायरिया से होने वाली मृत्यु का प्रमुख कारण उपचार में की गयी देरी होती है। उन्होंने बताया गर्भवती महिलाओं में डायरिया के लक्षण परेशानी का सबब बन जाते हैं। क्योंकि गर्भावस्था के दौरान डायरिया होने से शिशु का विकास अवरुद्ध हो सकता है। इसलिए गर्मी के मौसम में शिशुओं के साथ साथ गर्भवती महिलाओं का भी ध्यान रखना होता है। इसके लिए सबसे अधिक जरूरी खानपान पर ध्यान देना होगा। बच्चों व गर्भवतियों के साथ साथ सभी को इस मौसम में अधिक से अधिक तरल पदार्थ का सेवन करना चाहिए।
    इन लक्ष्णों का रखें ध्यान :
  • लगातार पतले दस्त का होना
  • बार-बार दस्त के साथ उल्टी का होना
  • प्यास का बढ़ जाना
  • भूख का कम जाना या खाना नहीं खाना
  • दस्त के साथ हल्के बुखार का आना
  • दस्त में खून आना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *