आरा। 20 दिवसीय कार्यशाला के आठवें दिन छात्रों को खुद से एक्ट को बनाकर प्रस्तुत करने का टास्क दिया गया। इस दौरान ए, बी, सी, डी और इ ग्रुप बना कर बच्चों को बराबर बराबर बांट दिया गया। उसके बाद सभी ग्रुप के बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान भ्रूण हत्या को दर्शाया गया। नाटक के द्वारा समाज को भ्रूण हत्या एक क्राइम है, यह संदेश भी दिया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी व निदेशक रवींद्र भारती ने बच्चों को अभिनय के प्रकार को बताया। उन्होंने सभी प्रकार के अभिनय के बारे बच्चों को बताया। फिर बच्चों ने प्रैक्टिकली भी किया।

उसके बाद रंगकर्मी चंद्रभूषण पांडेय ने बॉडी ऐक्ट की बारीकियों को बताया। उन्होंने बच्चों को बड़ी सहजता के साथ बतलाया कि वे भी उनसे सीखने आये हैं। ये सहजता बच्चों में आत्मबल को बढ़ाने और उनकी झिझकता को दूर करने के लिए उन्होंने अपनायी। उन्होंने बताया कि फेस एक्सप्रेशन से पहले बॉडी के एक्सप्रेशन की जरूरत होती है और इसके लिए पूरे बॉडी पर एक्टर का कमांड रहना बेहद जरूरी है। साथ ही उन्होंने कई प्रकार के अभिनय के बारे में बताया।

उसके बाद सभी बच्चों ने 27 देश अपने बाइक से घूम कर आये, आरा के रहने वाले प्रशांत से बातें की। आरा के गोढना रोड के रहने वाले इंजीनियर प्रशांत ने अपनी 27 देशों की कहानी बच्चों के साथ साझा किया। इस दौरान उन्होंने अपने कामों को बताया। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी समान को फेंकना नहीं चाहिए। बल्कि उस समान का हम क्या प्रयोग कर सकते है। उसके बारे में सोचना चाहिए। पानी के बोतल से क्या क्या बना सकते है। टायर से क्या बना सकते है। चैन से क्या क्या बना सकते है। तो किसी भी खराब हुई वस्तुओं को कैसे अपने जीवन अपने कार्यो में उसका प्रयोग कर सकते है। उसके बारे में बताया।

फिर कार्यशाला में संगीत के गुर संगीतकार प्रकाश सुमन के द्वारा सिखाए गए। सभी बच्चों ने एक साथ गाना गुनगुनाया। फिर एक एक कर बच्चों से भी संगीत को गाने के लिए कहा गया। किसी ने अंग्रेजी में गाना गया तो किसी ने भोजपुरी और हिंदी में गाना प्रस्तुत किया। फिर तबलावादक अंजनी कुमार सिंह व गीतकार सतीश मुन्ना ने भी बच्चों को संगीत के गुर को सिखाया। मौके पर शैलेन्द्र सच्चु, मनोज श्रीवास्तव व अन्य मौजूद थे।

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