आरा। 20 दिवसीय कार्यशाला के दसवें दिन नाटक का गुर सीख रहे बच्चों को आरा के वीर कुंवर सिंह पार्क में ले जाया गया। ताकि आउट डोर में भी नाटक कर सके। इस दौरान रंगकर्मी ओपी पांडेय ने बच्चों को छाता और टोपी का प्रयोग कर नाटक करने का टास्क दिया। जिसके बाद सभी मौजूद कलाकारों को  ए, बी, सी, डी और इ ग्रुप बना कर बराबर बराबर बांट दिया गया। उसके बाद वीडियो शूट करने के तरीके को बताया गया। बच्चो को बाहर खुले पार्क में ले जाने के बाद उनको कैमरा के बारे में और उनके लेंस के प्रयोग के बारे में बताया गया। सभी ने कैमरा चलाने का गुर बारी बारी से सीखा। उसके बाद सब ने एक एक कार दो दो मिनट की फ़िल्म शूट की। टास्क के अनुसार बच्चो ने उस दो मिनट के वीडियो में छाते और टोपी की मदद से वीडियो को पूरा किया। इस दौरान ऋत्विक, विक्की, अमित, हृतिक ने आदिमानव के जिंदगी पर भूमिका को निभाया। उसके बाद अभिराम और उसके टीम ने वैम्पायर का किरदार किया। जिसके अंत में मां दुर्गा बन आकांक्षा ने वध किया। तो वहीं अदिति व ग्रुप ने पेड़ काटने से जिंदगी तहस नहस हो जाएगी इसपर एक शार्ट फ़िल्म शूट किया। इस दौरान पार्क में लोगों की भीड़ उमड़ गई। लोग एक एक कार सबका एक्ट देखने लगे। ऋत्विक के टीम का अभिनय देखकर सभी ने ताली बजाया। इनकी टीम ने एक आदिवासी के समय की कहानी को नए तरीके से दर्शाया। जो सभी को अच्छा लगा। मौके पर मौजूद रवींद्र भारती ने बताया कि बच्चों को नौ दिनों से एक कमरे में नाटक का गुर सिखाया जा रहा था। लेकिन मंगलवार को आउट डोर लाया गया है। ताकि इनके अंदर जो झिझक है। वो दूर हो जाये। वहीं कार्यक्रम मैनेजमेंट मनोज श्रीवास्तव ने किया।

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